फरीदाबाद: जीवा पब्लिक स्कूल में संस्कार मेले का आयोजन, बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

  • फरीदाबाद के जीवा पब्लिक स्कूल में संस्कार मेला,
  • अतुल्य भारत थीम पर दिखी देश की संस्कृति,
  • संस्कार, संस्कृति और विज्ञान का संगम,
  • जीवा पब्लिक स्कूल के संस्कार मेले में काल भैरव नृत्य-नाटिका रही आकर्षण का केंद्र,
  • जीवा पब्लिक स्कूल में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा,
  • अभिभावकों ने भी खेलों में लिया हिस्सा,

 

फरीदाबाद। सेक्टर 21 बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल में वार्षिकोत्सव संस्कार मेले का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को समर्पित इस आयोजन में बच्चों ने नृत्य, नाटक, संगीत, खेल और विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। मेले की मुख्य थीम ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ (अतुल्य भारत) रही। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक शामिल हुए।

दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

भारतीय परंपरा के अनुसार मेले की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान, उपाध्यक्ष चंद्रलता चौहान, डायरेक्टर ऑफ जीवा आयुर्वेदा डॉ. प्रताप चौहान, एकेडमिक हेड मुक्ता सचदेव, सी.ई.ओ. जीवा आयुर्वेद मधुसूदन चौहान, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आयुर्वेद सुकाजल चौहान, एजुकेशनल एवं एच.आर. डायरेक्टर सुमीनाक्षी सिंह, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आयुर्वेद सुनीरजा चौहान और प्रधानाचार्या डॉ. नरजीत कौर उपस्थित रहे।

अतिथियों के स्वागत के बाद विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला शुरू की। कार्यक्रम में भारतीय परंपराओं, इतिहास और देश की विविधता को दर्शाने वाली प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

गणेश वंदना से लेकर काल भैरव नृत्य-नाटिका तक

कार्यक्रम का आरंभ विद्यार्थियों की गणेश वंदना से हुआ। इसके बाद स्वाध्याय नाटिका, पंजाबी लोकनृत्य, रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित नाटिका और देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियां हुईं।

शिव पुराण पर आधारित काल भैरव नृत्य-नाटिका कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। विद्यार्थियों ने इस प्रस्तुति को नृत्य और अभिनय के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा।

विभिन्न लोकनृत्यों के जरिए विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति की विविधता दिखाई। वहीं, विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ऑर्केस्ट्रा की मधुर धुनों ने कार्यक्रम में संगीत का रंग भर दिया।

इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने अपनी कला, आत्मविश्वास और मंचीय कौशल का प्रदर्शन किया।

‘इनक्रेडिबल इंडिया’ थीम पर दिखी पांच राज्यों की संस्कृति

संस्कार मेले की विशेष थीम ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की संस्कृति, परंपराओं और मनोरंजक गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया।

मेले में अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक विशेषताओं को दर्शाने के साथ बच्चों और अभिभावकों के लिए विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया।

बैलून जगल, फीड द कैमल, रिंग द रूटीन, जायंट जेंगा और ब्रेक द पिरामिड जैसे खेलों ने लोगों का मनोरंजन किया। स्पोर्ट्स गेम्स के अंतर्गत डार्ट गेम सहित कई गतिविधियां आयोजित की गईं।

इन खेलों में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे मेले में परिवारों की सहभागिता बढ़ी और बच्चों को मनोरंजन के साथ खेल भावना का अनुभव मिला।

रोबोटिक्स और ए.टी.एल. प्रोजेक्ट्स ने दिखाई वैज्ञानिक सोच

मेले में मनोरंजन के साथ विद्यार्थियों की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा को भी प्रदर्शित किया गया।

विद्यालय की ए.टी.एल. (अटल टिंकरिंग लैब) के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विभिन्न रोबोट और अभिनव प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इन मॉडलों ने बच्चों की रचनात्मकता, प्रयोग करने की क्षमता और वैज्ञानिक सोच को सामने रखा।

विद्यालय परिसर में कला केंद्र के माध्यम से विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई विभिन्न कलात्मक वस्तुओं का भी प्रदर्शन किया गया।

छोटे बच्चों के लिए टॉय ट्रेन विशेष आकर्षण रही। इसके अलावा परिसर में आयोजित डांडिया नृत्य में विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भाग लिया। पूरे आयोजन में बच्चों और परिवारों के लिए मनोरंजन तथा सहभागिता के अनेक अवसर उपलब्ध रहे।

डी.के.एन. और एस.ओ.ई. सिद्धांतों की दिखाई झलक

विद्यालय में आयोजित खेलों और गतिविधियों के माध्यम से जीवा पब्लिक स्कूल के मूल सिद्धांतों को भी प्रस्तुत किया गया।

विद्यालय के अनुसार, डी.के.एन. (दिनचर्या के नियम) और एस.ओ.ई. (स्वयं, अन्य एवं पर्यावरण) के विचारों को विभिन्न गतिविधियों में शामिल किया गया।

इन सिद्धांतों के माध्यम से विद्यार्थियों को अनुशासन, दूसरों के प्रति सम्मान और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का महत्व समझाने का प्रयास किया गया।

विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें जीवन में उपयोगी मूल्यों और व्यवहारिक कौशल से भी परिचित कराना है।

शिक्षा के साथ संस्कार और जीवन-मूल्यों पर जोर

विद्यालय के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है। विद्यार्थियों में जीवन-मूल्यों, संस्कारों, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि जीवा लर्निंग सिस्टम (JLS) के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हुए उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाता है।

ऋषिपाल चौहान के अनुसार, सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने के साथ उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और संस्कारवान नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष संस्कार मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें विद्यार्थी नृत्य, नाटक और खेलों के माध्यम से जीवन-मूल्यों से जुड़े संदेश प्रस्तुत करते हैं।

विद्यालय का प्रयास है कि बच्चे इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं और अभिभावक भी इन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

प्रधानाचार्या ने अभिभावकों की सहभागिता को सराहा

प्रधानाचार्या डॉ. नरजीत कौर ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि अभिभावक जीवन-मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन का हिस्सा बने।

उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य बच्चों को जीवन-कौशल और संस्कारों से समृद्ध करना है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और परिवार के साथ सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

विद्यालय की उपाध्यक्ष चंद्रलता चौहान, एकेडमिक हेड मुक्ता सचदेव और प्रधानाचार्या डॉ. नरजीत कौर ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की।

उन्होंने बच्चों को उनके प्रयासों के लिए प्रोत्साहित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

संस्कार और रचनात्मकता का संदेश देकर संपन्न हुआ मेला

जीवा पब्लिक स्कूल का संस्कार मेला भारतीय संस्कृति, परंपरा, शिक्षा और आधुनिक रचनात्मकता को एक मंच पर लाने का प्रयास रहा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मनोरंजक खेलों, कला प्रदर्शन और तकनीकी प्रोजेक्ट्स के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।

विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, ऐसे आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास और जीवन-मूल्यों को मजबूत करने में सहायक हैं।

 

 

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